🌳जो चाहोगे सो पाओगे 🌳
एक साधु था, वह प्रतिदिन घाट के किनारे बैठ कर चिल्लाया करता था, “जो चाहोगे सो पाओगे”, जो चाहोगे सो पाओगे।” बहुत से लोग वहाँ से गुजरते थे पर कोई भी उसकी बात पर ध्यान नहीं देता था और सब उसे एक पागल साधु समझते थे। एक दिन एक युवक वहाँ से गुजरा और उसने उस साधु की आवाज सुनी, “जो चाहोगे सो पाओगे”, जो चाहोगे सो पाओगे।” और आवाज सुनते ही उसके पास चला गया। उसने साधु से पूछा- “महाराज आप बोल रहे थे कि ‘जो चाहोगे सो पाओगे’ तो क्या आप मुझको वो दे सकते हो जो मैं चाहता हूँ?” साधु उसकी बात को सुनकर बोला- “हाँ बेटा तुम जो कुछ भी चाहता है मैं उसे अवश्य दूंगा, बस तुम्हें मेरी बात माननी होगी। किन्तु पहले ये तो बताओ कि तुम्हें आखिर चाहिये क्या?” युवक बोला- “मेरी एक ही इच्छा है की मैं हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी बनना चाहता हूँ।” साधू बोला, “कोई बात नहीं, मैं तुम्हें एक हीरा और एक मोती देता हूँ, उससे तुम जितने भी हीरे मोती बनाना चाहोगे बना पाओगे!” और ऐसा कहते हुए साधु ने अपना हाथ युवक की हथेली पर रखते हुए कहा, “पुत्र, मैं तुम्हें दुनिया का सबसे अनमोल हीरा दे रहा हूं, लोग इसे ‘समय’ कहते हैं, इस...